“मोदी है ना” अभियान की शुरुआत पर गरिमा दसौनी का कड़ा हमला, आमजन से की ये अपील

भाजपा महानगर इकाई और भाजयुमो द्वारा संयुक्त रूप से 24 दिसंबर 2023 को “मोदी है ना” अभियान की शुरुआत करने पर उत्तराखंड कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता गरिमा मेहरा दसौनी ने कड़ा हमला बोला है। दसौनी ने कहा की उत्तराखंड और उत्तराखंड वासियों के हितों के संरक्षण हेतु दो दर्जन से अधिक राजनीतिक एवं सामाजिक संगठन 24 दिसंबर 2023 को देहरादून के परेड ग्राउंड में बड़ी संख्या में एकत्रित होने जा रहे हैं।

मूल निवास और भू कानून लंबे समय से उत्तराखंड के जनमानस की मांग रहा है इस महा रैली को उत्तराखंड कांग्रेस ने भी अपना पूर्ण समर्थन देने की घोषणा की है। इस सब के बीच भारतीय जनता पार्टी का “मोदी है ना” अभियान की शुरुआत भी उसी दिन करना सुनियोजित षड्यंत्र है। दसौनी ने कहा की भारतीय जनता पार्टी कभी भी उत्तराखंड और उत्तराखंड वासियों की हितैषी नहीं रही है, यदि होती तो आज उत्तराखंड के पास लोकायुक्त और स्थाई राजधानी होती।

दसौनी ने कटाक्ष करते हुए कहा की उत्तराखंड की जनता ने भारतीय जनता पार्टी पर विश्वास जताते हुए उसे प्रचंड बहुमत और ट्रिपल इंजन की सरकार दी ,इसके बदले में होना यह चाहिए था की उत्तराखंड के मूल निवास और भू कानून की मांग पर सत्ता रूढ़ दल होने के नाते भाजपा सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ एक रचनात्मक पहल करती और सरकार इसपर ठोस निर्णय लेती परंतु आज जिस तरह से समूचा उत्तराखंड इन मुद्दों पर एकजुट दिखाई पड़ रहा है वही इस अभियान को नुकसान पहुंचाने के लिए भारतीय जनता पार्टी की महानगर इकाई और भाजयुमो ने अपनी डफली अपना राग बजाना शुरू कर दिया है जो की बहुत ही निंदनीय है।

दसौनी ने कहा कि निश्चित रूप से आज यदि अग्नि वीर जैसी आत्मघाती योजना के चलते उत्तराखंड का युवा आत्महत्या करने को मजबूर हो रहा है तो कहा जा सकता है कि मोदी है ना ? अंकिता भंडारी को सवा साल बाद भी यदि न्याय नहीं मिल पाया तो मोदी है ना?
भर्ती परीक्षाओं में भ्रष्टाचार के चलते प्रदेश के युवाओं पर लाठी चार्ज हो रहा है मोदी है ना ?प्रदेश की बेरोजगारी दर 8.8 प्रतिशत हो गई है मोदी है ना ? एनसीआरबी की रिपोर्ट के अनुसार 2022-23 में 872 रेप केस दर्ज होना और 2023 24 की रिपोर्ट के हिसाब से हिमालयि राज्यों में उत्तराखंड का महिला अपराध में नंबर वन राज्य का गौरव हासिल करना अपने आप में बताता है कि मोदी है ना? उत्तराखंड के कर्मचारियों पर असमा लगना बताता है मोदी है न?

दसौनी ने कहा की आज उत्तराखंड अपने अस्तित्व के लिए लड़ रहा है। 24 दिसंबर को होने वाली रैली अस्मिता की और स्वाभिमान की रैली है । यह उत्तराखंड का दुर्भाग्य ही है की उत्तराखंड वासियों ने जिन लोगों को अपने जीवन की बागडोर सौंप उन् नेताओं ने ही उनकी पीठ पर छुरा भोंक दिया।
आज उत्तराखंड में बाहरी लोगों की मौज हो रही है और स्थानीय लोग दर दर की ठोकरे खाने को मजबूर है ।  उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी की महानगर इकाई और भाजयुमो को शर्म आनी चाहिए की जहां उन्हें प्रदेश के युवाओं महिलाओं किसानों के साथ इस महा रैली में कंधे से कंधा मिलाना चाहिए था उसके बजाय वह अपना एक अलग कार्यक्रम कर इस अभियान को नुकसान पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं ।

गरिमा ने उत्तराखंड वासियों का अहवाहन करते हुए कहा कि अभी भी देर नहीं हुई भाजपा रूपी उत्तराखंड। के दुश्मनों को उत्तराखंड की जनता को अब पहचान लेना चाहिए और ऐसे स्वार्थी लोगों को जो सिर्फ और सिर्फ अपने नेताओं की चाटुकारिता चरण वंदना और परिक्रमा करना जानते हैं सबक सिखाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा की भारतीय जनता पार्टी की दुकान में अब सामान का टोटा हो गया है ,राम मंदिर बनने के साथ ही जनता की भावनाओं का दोहन करने का कोई हथियार बाकी नहीं बचा ऐसे में मोदी जी के नाम को बेचने के अलावा उत्तराखंड भाजपा के पास कोई चारा नहीं बचा क्योंकि आज उत्तराखंड की जनता यह भली भांति जान चुकी है की कमल का फूल उनकी भूल था।