उत्त्तरकाशी : पिलंगगांव के हरिओम राणा दर्ज कराया गांव के इतिहास में अपना नाम

सरकारी नौकरी पाने वाले पिलंगगांव के पहले व्यक्ति बने हरिओम

सड़क से 18 किमी और विकास से कोसों दूर है पिलंगगांव

  • उत्त्तरकाशी

सिंचाई विभाग में सहायक भंडारपाल के पद पर नियुक्ति पाकर पिलंगगांव के हरिओम राणा ने गांव के ‌इतिहास में अपना नाम दर्ज करा लिया है। सरकारी
नौकरी पाने वाले वह अपने गांव के पहले व्यक्ति हैं। सड़क से 18 किमी दुर्गम पैदल दूरी पर स्थित इस बेहद पिछड़े गांव के चंद युवा ही उच्च शिक्षा हासिल कर पाए हैं।

भटवाड़ी प्रखंड के पिलंगगांव तक आजादी के दशकों बाद भी सड़क नहीं पहुंची है। ग्रामीण 18 किमी दुर्गम पैदल पगडंडियां लांघ कर सड़क तक पहुंचने को
मजबूर हैं। बीहड़ जंगलों से गुजरने वाले यह ऊबड़ खाबड़ रास्ते भी बरसात के दौरान क्षतिग्रस्त होने से ग्रामीण अपने घर गांव में कैद हो जाते हैं।

दशकों बाद गांव में बिजली की रोशनी तो पहुंची, लेकिन ग्रामीण दूरसंचार सुविधा से अब भी महरूम हैं। गांव में आठवीं तक पढ़ाई के लिए सरकारी स्कूल
है। इससे आगे की पढ़ाई के लिए बच्चों को 18 किमी दूर गंगोत्री हाईवे स्थित मल्ला हाईस्कूल और यहां से 6 किमी दूर राइंका भटवाड़ी आना पड़ता है।

यही कारण है कि ग्रामीण अपने बच्चों को आठवीं से आगे पढ़ाई नहीं करा पाते। शिक्षा के अभाव में ग्रामीण मूलभूत सुविधाओं की मांग और अपने अधिकारों की आवाज भी प्रभावी ढंग से नहीं उठा पाते।

शिक्षा के महत्व को समझते हुए हरिओम राणा ने आठवीं के बाद मल्ला में कमरा किराए पर लेकर हाईस्कूल और फिर भटवाड़ी से इंटरमीडिएट की परीक्षा
उत्तीर्ण की।

इसके बाद उन्होंने प्राईवेट ही स्नातक और परास्नातक की पढ़ाई की। उनकी मेहनत रंग लाई और उनका चयन समूह’ग’ की परीक्षा में हुआ। उन्हें सिंचाई विभाग में सहायक भंडारपाल के पद पर नियुक्ति मिली है। इसके
साथ ही वह सरकारी नौकरी पाने वाले अपने गांव के पहले व्यक्ति बन गए हैं।

जिससे उनके परिजनों के साथ ही ग्रामीणों में भी हर्ष व्याप्त है। अब अन्य ग्रामीण भी अपने बच्चों को उच्च शिक्षा दिलाकर उनका भविष्य संवारने की
कोशिश में जुट गए हैं।

 

हरिओम बताते हैं कि उनके पिता अमर सिंह राणा पूर्व में गांव के प्रधान रहे हैं और वर्तमान में उनका भाई अतर सिंह पिलंगगांव का प्रधान है। उनके
सरकारी सेवा में चयनित होने से ग्रामीणों की उम्मीदें बढ़ गई हैं।

वह स्वयं भी गांव के युवाओं को उच्च शिक्षा के लिए प्रेरित करने के साथ ही प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में सहयोग कर रहे हैं। ताकि शिक्षा एवं रोजगार की मदद से इस पिछड़े हुए गांव की तस्वीर बदली जा सके।