उत्त्तरकाशी : जिला पंचायत की जांच को लेकर चर्चा…पढ़ें क्या था जांच रिपोर्ट में

  • उत्त्तरकाशी

जिला पंचायत उत्तरकाशी में हुए करोड़ों के घोटाले की पुष्टि डीएम मयूर दीक्षित द्वारा बीते साल 5 दिसंबर को शासन को भेजी गई जांच रिपोर्ट में हुई है। इस रिपोर्ट के अनुसार जिला पंचायत की 549 योजनाओं की जांच में 349 योजनाओं में धरातल पर धेले भर का काम नहीं हुआ। यह जांच रिपोर्ट वायरल होने पर अब जिला पंचायत पर शिकंजा कसा जाना तय माना जा रहा है।

बीते साल एक नवंबर को जिला पंचायत सदस्य हाकम सिंह ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर जिला पंचायत उत्तरकाशी द्वारा धरातल पर कार्य कराए बिना करोड़ों रुपये के गोलमाल का आरोप लगाया था। इस मामले में सीएम के आदेश पर गढ़वाल कमिश्नर ने डीएम उत्तरकाशी को जांच के आदेश दिए थे। तब डीएम मयूर दीक्षित ने लोनिवि, सिंचाई विभाग एवं ब्लाक के कर्मचारियों की कुल 24 टीमें गठित कर जिला पंचायत द्वारा कराए गए कार्यों की स्थलीय जांच कराई थी। डीएम ने बीते साल 5 दिसंबर को ही इसकी विस्तृत रिपोर्ट शासन को प्रेषित कर दी थी।

इसके बाद यह मामला हाईकोर्ट पहुंचा और तब से एक के बाद एक जांच आदेशों में ही यह मामला उलझा हुआ है। बुधवार को कलक्ट्रेट में धरने पर बैठे जिला पंचायत सदस्यों ने इस मामले में डीएम द्वारा शासन को सौंपी गई जांच का खुलासा किया।

जिला पंचायत सदस्य चंदन पंवार, आनंद सिंह राणा, दलबीर चंद, पवन पंवार आदि ने बताया कि डीएम की रिपोर्ट में आरोपों की पुष्टि हुई है। ऐसे में सरकार को इस रिपोर्ट पर संज्ञान लेकर शीघ्र दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए।

डीएम की रिपोर्ट के अनुसार जिला पंचायत की 11 दिसंबर 2019 को हुई बैठक में 27 करोड़ 99 लाख 72 हजार रुपये लागत की कुल 1234 योजनाएं अनुमोदित की गईं। जिसमें से मार्च 2020 के बाद 14 करोड़ 46 लाख 78 हजार रुपये लागत की 748 योजनाओं का कार्य पूरा दिखाया गया।

इनमें से कुल 10 करोड़ 3 लाख रुपये लागत की 549 योजनाओं की स्थलीय जांच कराई गई। जिसमें 349 योजनाओं में धरातल पर कोई कार्य नहीं हुआ। जबकि इनमें से 175 योजनाओं का 3 करोड़ 12 लाख 60 हजार रुपये भुगतान किया जा चुका है। जबकि शेष 174 योजनाओं के भुगतान की प्रक्रिया गतिमान है।

अन्य योजनाएं भी धरातल पर आधी अधूरी तथा 3-4 साल पुरानी होनी पाई गई। डीएम ने रिपोर्ट में इसे घोर वित्तीय अनियमितता बताते हुए जिला पंचायत के सभी कार्यों की उच्च स्तरीय जांच की संस्तुति की है। इसके अलावा डीएम ने फर्जी मस्टररोल निकाले जाने, यात्रा काल में दैनिक वेतन पर लगाए गए 70 सफाई कर्मियों के आधार कार्डों का मिलान नहीं होने, वित्त अधिकारी के हस्ताक्षरों के बिना करोड़ों रुपये का आहरण करने, निर्माण कार्यों की निविदा प्रकाशन में नियमों के उल्लंघन, एक सहकारी संस्था को आठ कार्यों का दो बार भुगतान करने की पुष्टि की है।

 

मयूर दी‌क्षित, डीएम उत्तरकाशी ने बताया कि शासन के आदेश पर कराई गई जांच की रिपोर्ट शासन को सौंपी जा चुकी है। इस मामले में शासन स्तर से ही कार्रवाई होनी है। जांच रिपोर्ट के बारे में मैं कोई टिप्पणी नहीं कर सकता।