उत्त्तरकाशी : लोक गाथाओं पर आधारित गजू मलारी एक प्रेम कहानी : संवेदना समूह के नाटक ने लूटी माघ मेले की अंतिम स्टार नाईट…आप भी पढ़ें क्या है कहानी

  • उत्त्तरकाशी / आशीष मिश्रा

उत्तराखंड में अनेक लोक गाथाएं प्रचलित हैं, वहीँ उत्त्तरकाशी में कई ऐसी गाथाएं हैं जो हम दादी-नानी से सुना करते हैं, जिनमे कई प्रेम गाथाएं भी हैं, संवेदना समूह ने अपने नाटकों से कई गाथाएं दिखाई है जिसमे गंगू रमोला,कचड़ू,जीतू बगडवाल प्रमुख है और इस बार गजू मलारी।

गज्जू मलारी उत्तरकाशी जनपद के पर्वत क्षेत्र भितरी- दोणी के युवक व युवती की प्रेम गाथा है। जिसका लिखित रूप से कोई उल्लेख नहीं है परंतु कुछ पौराणिक लोकगीतों व जन सुर्खियों के द्वारा उनके प्रेम का उल्लेख मिलता है, उसी अनुसार नाटकीय रूपांतरण किया गया, जिससे कि युवा पीढ़ी लोक गाथाओं को जान सके और अपनी पौराणिक संस्कृति वेशभूषा रहन-सहन को जान सके।

कहानी है गजे सिंह की जो भीतरी- दोणी का रहने वाला एक भेड़ पालक है, जबकि मलारी एक खूबसूरत युवती होती है जो कि दोणी गांव के थोकदार मौणया सौन्दण की बेटी है, मलारी की ही तरह सुंदर उसकी छोटी बहन सलारी भी है।

नाटक के अनुसार जब सलारी व मलारी दोनों बहिने जंगल में घास काटने जाती है तो वह एक आदमखोर बाघ उन पर हमला करता है, तभी गजे सिंह वहा पहुंचता है और मलारी की जान बचाता है, जहां दोनों की नजरें मिलती हैं ।गजे सिंह मलारी के रूप रंग को देखकर मलारी के प्रेम में इस तरह डूब जाता है कि अपने सपनों में भी उसे देखने लगता है ।

गजू के दोस्त भिमु व मानी को उसके मलारी से प्रेम होने का एहसास हो जाता है, गजू अपने दोस्तों के साथ जंगलों से वापस घर आ रहा होता है तो तमाखू लेने के लिए उसे दोणी गांव जाना पड़ता है, जहां धारे में पानी लाने आई दोनों बहने सलारी व मलारी से फिर उसकी मुलाकात होती है और वहां वह मलारी को नैटवाड़ के मेले में मिलने को कहता है।

जब दोनों बहनें मेला घूम रही होती है तो दोणी गांव का रणु उसे परेशान करने लगता है, गजे सिंह उसे देखता है तो वह रणु की पिटाई कर देता है, बदले में रणु मलारी को सारे गांव में बदनाम कर देता है, जिसकी भनक जब
थोकदार मौणया सौन्दण को लगती है तो वहां मलारी का घर की चौखट से बाहर निकलना बंद कर देता है।

मलारी गजू के वियोग में दुखी रहने लगती है और बीमार पड़ जाती है। अंत में थोकदार मौणया सौन्दण को एहसास होता है की उससे भूल हुई है और वह मलारी के कहने पर गज्जू को बुलाता है।

परंतु तब तक बहुत देर हो जाती है, गज्जू आता है और मलारी अपना दम गज्जू की बाहों में तोड़ देती है।

यह नाटक संवेदना समूह के कलाकारों ने माघ मेला 2019 में किया जो पूरे मेले में आकर्षण का केंद्र बना।
इस कहानी के लेखक अजय नौटियाल व निर्देशक जय प्रकाश राणा बताते हैं कि इस कहानी में हमारी संस्कृति के विभिन्न रंग हैं, जिन्हें नाटक के माध्यम से दिखाने का हमारा प्रयास है, इस कथा में प्रेम के साथ हास्य – दुख का मिश्रण है, जिससे जीवंतता प्रदान करने की हमने पूरी कोशिश की है ।

नाटक का मुख्य किरदार गाजे सिंह का विपिन नेगी ने निभाया है जो की पेशे से पात्रकार हैं।
वहीँ मलारी – गंगा डोगरा , सलारी- प्रियंका गुसांई,मौणया सौन्दण – राजेश जोशी मानी – मनवीर सिंह रावत,भिमु- मनमोहन सिंह राणा,रणु-हरदेव सिंह पंवार,सुंदरू-उत्तम रावत, आदि लोगो ने इस नाटक ने प्रतिभाग किया।
कहानी के लेखक व गीत संगीत अजय नौटियाल ने किया।नाटक को प्रकाश राणा ने निर्देशित किया।संगीत में संजय पंवार, मनवीर सिंह,आराधना,अंजली राणा, दीप्ती,शुधांशु भट्ट ने अपनी आवाज दी ।