उत्तरकाशी : विदेशियों के लिए चौबीस घंटे खुली हर्षिल घाटी

  • INDIA 121

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने उत्तरकाशी जिले के हर्षिल कस्बे को इनर लाइन से मुक्त कर देशी – विदेशी पर्यटकों के लिए खोल दिया है। इसके साथ ही अब नेलांग घाटी में भी विदेशी पर्यटक घूम सकेंगे। गृह मंत्रालय ने इस संबंध में गत 19 जून को आदेश जारी किया था। 

विदेशी पर्यटक अब उत्तरकाशी के हर्षिल में रात को भी रुक सकते हैं और नीलोंग घाटी की यात्रा भी कर सकते हैं क्योंकि गृह मंत्रालय ने हर्षिल को विदेशियों के लिए आंतरिक लाइन परमिट की आवश्यकता से मुक्त कर दिया है और पहली बार नेलोंग घाटी को खोला है।

चीन के साथ 1962 के युद्ध के बाद, दोनों हर्षिल और नीलोंग घाटी को गृह मंत्रालय द्वारा संवेदनशील क्षेत्रों घोषित किया था ।

हर्षिल विदेशी पर्यटकों के रडार से दूर था क्योंकि उन्हें परमिट की आवश्यकता थी और रात को वहां रुकना संभव नहीं था |

लेकिन घरेलू पर्यटकों को ऐसा करने के लिए आंतरिक रेखा परमिट की आवश्यकता नहीं थी। सुरम्य नेलोंग घाटी दोनों विदेशी और घरेलू पर्यटकों के लिए पूरी तरह से सीमा के बाहर थी। अब, दोनों विदेशी और स्थानीय पर्यटकों को एक दिन के लिए घाटी में जाने की अनुमति दी जाएगी।

“इस साल 19 जून को गृह मंत्रालय ने विदेशी पर्यटकों के लिए हर्षिल को आंतरिक रेखा परमिट की आवश्यकता से मुक्त करने के लिए एक अधिसूचना जारी की थी और एकल खिड़की प्रणाली के लिए अनुमति देकर पर्यटकों के लिए नीलोंग घाटी भी खोल दिया ।

गृह मंत्रालय की अधिसूचना में कहा गया है, “यह सूचित किया गया है कि विदेशी / घरेलू पर्यटकों के रहने की सुविधा के लिए 50 मीटर की सीमा तक हर्षिल शहर से अधिसूचित संरक्षित क्षेत्र को बदलने और सीमा के भीतर की लाइन परमिट को ऊपर उठाया जाए।”

हालांकि, पर्यटकों को अनुमति देने के लिए जिला प्रशासन को सैन्य अधिकारियों की सहमति लेनी होगी।

उत्तरकाशी निवासी व  बीजेपी नेता लोकेंद्र सिंह बिष्ट जिन्होंने इस पहल की शुरूआत की उन्होंने कहा कि नीलोंग घाटी और हर्षिल पर्यटन को बढ़ावा देगी और स्थानियों को रोजगार के अवसर मिलेंगे

लोकेंद्र सिंह बिष्ट ने कहा कि हर्षिल घाटी की बंदिशें खत्म होने के बाद पर्यटन की तकदीर खुल चुकी है। नेलांग और हर्षिल 1-1 माह विदेशी पर्यटकों की भरमार रहेगी। अब उत्तरकाशी जिले के पर्यटन व्यवसाय के ढर्रे पर लौटने तथा स्थानीय जनमानस की आर्थिक जीवन रेखा में बदलाव आने की उम्मीद जगी है। 

  • BY INDIA 121